-->

gkexpres site ke madat se hum logon ko new upcoming movie,current affairs new technology,historycal facts,indian ,odisha job,festivals,artichteture,internet,gk,earning app review,type ke sare jankari dete hain

बुधवार, 2 दिसंबर 2020

sulia jatra history (balangir khairguda sulia jatra )

balangir sulia jatra history किया है बतादूँ सुलिआ एक देवता का नाम है जिसके त्विहार को sulia jatra कहाजाता है। यह पश्चिम ओडिशा के बलांगीर जिल्ला के एक प्रसिद्ध पारम्परिक त्विहार है जो साल में एक ही बार मनाया जाता है ! यह पूजा बलांगीर जिल्ले के khairguda गाओं के आदिबासी लोग मनाते है जिसे देखने केलिए लाखों लोगों के भीड़ लगता है ! सुलिआ जात्रा हर साल पौस मास अमबस्या के पहेली मंगलबार के दिन मनाया जाता है जो सुभे 4 बजे से लेके साम 6 बजै तक ! यह त्विहार के हर एक गाथा को निचे बारीकी से जानकारी दिया गया है जरूर पढ़ें !

sulia jatra history 

अगर हम sulia jatra history के बात करें तो सदिओं पहले ओडिशा राज्य में कुछ लोग सेहर और गाओं से दूर पहाड़ पर्बतों के बीज घने जंगल में रहते थे जिन्हे आदिबासी कहाजाता है जिनका कोई बास्ता नहीं होता है गाओं या सेहर के लोगों के साथ ! गाथा के अनुसार फूलबानी जिल्ले के पास कुड़सिंघ नामक एक जगह हुआ करता था जहाँ कई सरे आदिबासी लोग रहते थे जो अपने श्रेष्ठ देवी देवता को पूजा किया करते थे सुलिआ देवता उनमे से एक थे ! एक दिन पूजा के कुछ गलती के कारन सुलिआ देवता वहां से रूठ कर चलेगये थे बलांगीर जिल्ले के एक बड़े से पहाड़ के ऊपर जिसे अभी सुलिआ पर्बत भी कहाजाता है जो बलांगीर का सबसे बड़ा पहाड़ है।

 

अपने देवता यानि सुलिआ माँ को मानाने केलिए कुड़सिंघ के अदीबासिओं ने चल कर उस पर्वत पर आपहचें और अपने देवता को मानाने लगे और साथ चलने कलिये कहते है ! सुलिआ देवता ने उन अदीबासिओं को वहीँ पर्वत में पूजा करने केलिए आदेश देते है और उन दिनों से उनदिबासिओं ने बलांगीर जिल्ला के उस पर्वत के निचे ही रहने लगे जिसे आज खैरगुरहा की नाम से जाना जाता है जो सुलिअ पहाड़ के ठीक निचे ही बस्ती बैठा हुआ है,

 

गाथा- 2  sulia jatra history - कई साल उस पर्बत के ऊपर पूजा करने के बाद एक बार सुलिअ देवता के पूझारी पूजा ख़तम करके पूजा के कलस भूल आये थे और जब पूझारी को कलस याद आता है तब वो लेने वापस जाते है पर उस वक़्त वहां सुलिआ देवता के साथ अपने भाई बेहेन यानि सरे देवी देवतायें ने मिल के अपने भोग लेरहे थे और जब पूझारी कलस लेने जाता है तो यह सारा दृश्य पूझारी देखलेता है जब की वो नहीं देखना चाहिए था उसी बात को गुस्सा होकर माँ सुलिआ गुस्सा होकर वही कलस को फ़ेंक देते है जो पहाड़ से निचे गिरता है और माँ सुलिआ कहते है की आज से यहाँ पूजा करने नहीं आना कलस जहाँ गिरा है वहीं पूजा करना तब से लेके आज दिन तक पूजा वहीं होता है जहाँ कलस गिरा था ठीक निचे khairguda गाओं स्थित है।

sulia-jatra-history

sulia jatra

सुलिआ जात्रा कैसे मनाया जाता है 

सुलिआ देवता को जो कोई भी मानता है उसे माँ सुलिआ के हमेसा कृपा रहता है और वही इंसान का मनकामना हमेसा पूरा होता है ! सुलिआ जात्रा एक मेला की तरह होता है और यह पूजा केबल एक दिन केलिए होता है जाहां लाखों भक्त इकठा होते हो माँ सुलिआ को दर्सन करने केलिए। सुलिआ देवता को सिर्फ एक ही इंसान पूजा करता है जिसे राज देहरी कहाजाता और बाकि सब उनका साथ देते है पूजा करने केलिए। बतादूँ पूजा करने केलिए बहुत ही निष्ठा और भक्ति के साथ उपासना करना पड़ता है नहीं तो कुचना कुछ अमंगल जरूर घटता है।


सुलिआ एक देवता है इसीलिए लोग उन्हें अपने मनकामनाएं पूरा होने पर पोढ़,बकरी,और मुर्गा बलि चढ़ाते ते है जो द्रिस्य बहुत ही भयानक होता है। पूजा के दिन सभी अदीबासिओं के हाथ में कुराड़ी (Axe) होता है यानि एक सस्त्र होता है जिसे ओड़िआ में टांगी कहाजाता है जहाँ ! इस बलि प्रथा को लेकर कईबार सर्कार ने भी अबाज उठाया था पर जिन जिन लोग भी माँ सुलिआ के बिरोध में जाते है उनके घर में कुचना कुछ अमंगल होजाता है इसीलिए बलि प्रथा को आज के तारीख सर्कार ने भी स्वीकृति देदिया है। बतादूँ की यह दिन सभी लोग सुभे से उपबास करते है साम तक जब तक पूजा ख़तम नहीं होजाता तबतक भूखे रहते है ! पूजा के दिन अगर कोई इंसान माँ सुलिआ के नाम पर उल्टा सीधा सोचता है तो उनके बुरा वक़्त सुरु होजाता हैध्यान रखें इस बात को।

sulia jatra date

  •  सुलिआ जात्रा 2021 date - 19 जानुयारी 2021 
  • सुलिआ जात्रा 2019 date - 31 दिसम्बर 
  • सुलिआ जात्रा 2018 date - जानुयारी 3 
  • सुलिआ जात्रा 2017 date - 02 जानुयारी 
  • सुलिआ जात्रा 2016 date - 30 जानुयारी 
  • सुलिआ जात्रा 2015 date - 26 जानुयारी 

बलांगीर सुलिआ जात्रा 

आज कल बलांगीर जिल्ले में कई सरे जगह में सुलिआ जात्रा किया जाता है पर सबसे प्रसिद्ध सुलिआ जात्रा खैरगुरह में होता है जो लगभग 150 सालों से होते आरहा है ! हम आपको इसी छोटे से आर्टिकल में सुलिअ जात्रा के सरे जानकारी दे रखे है और उम्मीद करते है की यह जानकारी आपको पसंद आया हो ! इसी आर्टिकल यानि sulia jatra history को लेके कुछ सबाल या सुझाब हो तो हमे जरूर कमेंट करना और साथ ही कमेंट में जय सुलिअ माँ जरूर लिखना 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

how can i helf you